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आज के समय में गांव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यहां से भी अच्छी कमाई के नए रास्ते निकल रहे हैं. कम पूंजी में शुरू होने वाले छोटे-छोटे बिजनेस गांव के लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. दूध, खेती, पैकिंग और घरेलू प्रोडक्ट जैसे काम अब घर बैठे शुरू किए जा सकते हैं. सही प्लानिंग और मेहनत से यही छोटे काम आगे चलकर मजबूत कमाई का जरिया बन जाते हैं.

गांव में डेयरी शुरू करना सबसे आसान और भरोसेमंद काम है. इसकी शुरुआत आप 2 से 4 गाय या भैंस से कर सकते हैं. सुबह-शाम दूध बेचकर रोज की कमाई होती है. दूध के साथ दही, घी और पनीर भी बनाया जा सकता है. यह बिजनेस सालभर चलता है. आसपास के कस्बों में सप्लाई करने से मुनाफा और बढ़ जाता है.

बकरी पालन कम खर्च में शुरू होने वाला बिजनेस है. 10 से 15 बकरियों से शुरुआत की जा सकती है. बकरी का दूध, बच्चे और मीट तीनों बिकते हैं. इसे किसी भी मौसम में शुरू किया जा सकता है. चारे की व्यवस्था गांव में आसानी से हो जाती है. मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए इस काम में कम समय में अच्छा रिटर्न मिलने लगता है.

इस टाइम मुर्गी पालन गांव में तेजी से चलने वाला बिजनेस है. इसमें 200 से 500 मुर्गियों से शुरुआत की जा सकती है. इसके अंडे और मीट दोनों की अच्छी डिमांड रहती है और 30 से 40 दिन में ही कमाई शुरू हो जाती है. सही देखभाल और साफ-सफाई से नुकसान कम होता है. शहरों में सप्लाई करने से मुनाफा दोगुना हो सकता है.
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गांव में आटा चक्की की जरूरत हमेशा रहती है. इसके लिए 40 से 60 हजार रुपये में मशीन आ जाती है और आप चाहें तो गेहूं पिसाई के साथ मसाले पीसने का काम भी जोड़ सकते हैं. रोजाना 500 से 1500 रुपये तक की कमाई हो सकती है. यह काम पूरे साल चलता है और इसमें ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती.

गांव में अचार, जैम और जूस बनाने का काम घर से ही आसानी से शुरू किया जा सकता है. इसमें लोकल फल और सब्जियों का इस्तेमाल होता है, जिससे लागत कम रहती है. शुरुआत में थोड़ी मात्रा बनाकर आसपास के लोगों और बाजार में बेच सकते हैं. अगर स्वाद अच्छा रहा तो लोग खुद दोबारा खरीदने लगते हैं. त्योहारों और मेलों के समय इसकी बिक्री ज्यादा होती है. धीरे-धीरे पैकिंग सुधारकर शहरों तक भी सप्लाई की जा सकती है.

गांव में बीज, खाद और कीटनाशक की दुकान हमेशा चलती है. किसान सीधे जरूरत के हिसाब से खरीदारी करते हैं. थोड़ी जानकारी और सही कंपनी से माल लेकर यह काम शुरू किया जा सकता है. खेती के मौसम में बिक्री ज्यादा होती है. भरोसा बनने के बाद ग्राहक खुद आते हैं और कमाई लगातार होती रहती है.

अगर गांव में फल और सब्जी की पैदावार होती है तो उनकी पैकिंग का काम बढ़िया कमाई का जरिया बन सकता है. टमाटर, आलू, नींबू या हरी सब्जियों को अच्छे से धोकर, छांटकर और साफ पैक करके बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी शुरुआत बहुत कम खर्च में हो जाती है. जब माल साफ और सही पैक होता है तो ग्राहक भरोसा करते हैं. यही भरोसा शहरों में भी अच्छा दाम दिलाता है.

गांव में तुलसी, नीम और आंवला जैसे पौधों की खेती करना मुनाफे वाला काम है. इन पौधों को ज्यादा पानी या खास देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती है, इसलिए खर्च भी कम आता है. एक बार खेत तैयार हो जाए तो सालों तक इनसे फायदा मिलता रहता है. आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली कंपनियां इन्हें अच्छे दाम पर खरीदती हैं. यही वजह है कि यह खेती आज के साथ-साथ आने वाले समय के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है.















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