हाथ से खाना खाने को लेकर ट्रोल हो चुके हैं जोहरान ममदानी, जानें सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है यह प्रक्रिया?

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जब हम हाथों से खाते हैं, तो खाना उठाने, तोड़ने और मिलाने में थोड़ा समय लगता है. इससे हम धीरे-धीरे खाते हैं, ज्यादा चबाते हैं और हमारी लार अच्छे से बनती है. इससे पेट में एंजाइम और एसिड सही मात्रा में बनते हैं, जिससे खाना अच्छी तरह पचता है.धीरे खाने की वजह से कब्ज जैसी दिक्कतें भी कम होती हैं.

जब हम हाथों से खाते हैं, तो खाना उठाने, तोड़ने और मिलाने में थोड़ा समय लगता है. इससे हम धीरे-धीरे खाते हैं, ज्यादा चबाते हैं और हमारी लार अच्छे से बनती है. इससे पेट में एंजाइम और एसिड सही मात्रा में बनते हैं, जिससे खाना अच्छी तरह पचता है.धीरे खाने की वजह से कब्ज जैसी दिक्कतें भी कम होती हैं.

हाथ से खाने में हमारी कई इंद्रियां जैसे touch, smell, sight शामिल होती हैं. खाने को छूने, उसकी गर्माहट और बनावट महसूस करने से हमारा दिमाग जल्दी संकेत देता है कि पेट भर गया है. इससे ज्यादा खाने की आदत पर काबू पाया जा सकता है और वजन कंट्रोल रखने में मदद मिलती है.

हाथ से खाने में हमारी कई इंद्रियां जैसे touch, smell, sight शामिल होती हैं. खाने को छूने, उसकी गर्माहट और बनावट महसूस करने से हमारा दिमाग जल्दी संकेत देता है कि पेट भर गया है. इससे ज्यादा खाने की आदत पर काबू पाया जा सकता है और वजन कंट्रोल रखने में मदद मिलती है.

साफ हाथों से खाना खाने का एक बड़ा फायदा यह है कि हमारे शरीर को अपने वातावरण के हल्के, खराब और खतरनाक जीवाणुओं का पता चलता है.ये हमारे इम्यून सिस्टम को सिखाते हैं कि कौन-से बैक्टीरिया हानिकारक हैं और कौन-से नहीं.इस तरह शरीर नेचुरल रूप से रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ा लेता है.

साफ हाथों से खाना खाने का एक बड़ा फायदा यह है कि हमारे शरीर को अपने वातावरण के हल्के, खराब और खतरनाक जीवाणुओं का पता चलता है.ये हमारे इम्यून सिस्टम को सिखाते हैं कि कौन-से बैक्टीरिया हानिकारक हैं और कौन-से नहीं.इस तरह शरीर नेचुरल रूप से रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ा लेता है.

हाथ से खाना खाने से हम अपने खाने के साथ ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं.हम उसकी गर्माहट, बनावट, नमी और टेस्ट को महसूस करते हैं, जिससे हम और अच्छे खाना खाते हैं. इसे ही माइंडफुल ईटिंग कहा जाता है जो आजकल मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है.

हाथ से खाना खाने से हम अपने खाने के साथ ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं.हम उसकी गर्माहट, बनावट, नमी और टेस्ट को महसूस करते हैं, जिससे हम और अच्छे खाना खाते हैं. इसे ही माइंडफुल ईटिंग कहा जाता है जो आजकल मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है.

हमारी उंगलियों की स्किन थोड़ी मोटी होती है, इसलिए वे एक तरह से नेचुरल थर्मामीटर की तरह काम करती हैं.जब हम खाने को हाथ से छूते हैं, तो हमें तुरंत पता चल जाता है कि खाना बहुत गर्म तो नहीं है.इससे मुंह जलने या ज्यादा गर्म खाने से होने वाली तकलीफें नहीं होती है.

हमारी उंगलियों की स्किन थोड़ी मोटी होती है, इसलिए वे एक तरह से नेचुरल थर्मामीटर की तरह काम करती हैं.जब हम खाने को हाथ से छूते हैं, तो हमें तुरंत पता चल जाता है कि खाना बहुत गर्म तो नहीं है.इससे मुंह जलने या ज्यादा गर्म खाने से होने वाली तकलीफें नहीं होती है.

भारत में हाथ से खाना सिर्फ आदत नहीं, बल्कि सम्मान और अपनापन दिखाने का तरीका भी है. यह खाने को एक संस्कार की तरह देखने की परंपरा से जुड़ा है. जहां खाना सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि जुड़ाव का प्रतीक होता है.

भारत में हाथ से खाना सिर्फ आदत नहीं, बल्कि सम्मान और अपनापन दिखाने का तरीका भी है. यह खाने को एक संस्कार की तरह देखने की परंपरा से जुड़ा है. जहां खाना सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि जुड़ाव का प्रतीक होता है.

हाथ से खाना तभी फायदेमंद है जब आप खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं साबुन और पानी से उंगलियां, हथेलियां और नाखूनों के नीचे की सफाई करना जरूरी है. साफ हाथों से खाने पर न कोई संक्रमण का डर रहता है, न कोई नुकसान, बस टेस्ट और हेल्थ दोनों मिलते हैं.

हाथ से खाना तभी फायदेमंद है जब आप खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं साबुन और पानी से उंगलियां, हथेलियां और नाखूनों के नीचे की सफाई करना जरूरी है. साफ हाथों से खाने पर न कोई संक्रमण का डर रहता है, न कोई नुकसान, बस टेस्ट और हेल्थ दोनों मिलते हैं.

Published at : 07 Nov 2025 07:01 AM (IST)

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