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हॉलीवुड एक्ट्रेस मार्गोट रॉबी एक खास तरह का नेकलेस पहनकर फिल्म “वुथरिंग हाइट्स” के प्रीमियर में पहुंची. फोटोज सामने आते ही इसे लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गयी है. ये नेकलेस क्यों मामूली नहीं है, ये अंग्रेजों द्वारा भारत से ले जाए गए बेशकिमती जेवरात में से एक है, जिसे ताजमहल डायमंड कहा जाता है. इसका कनेक्शन मुगलमहारानी नूरजहां से बताया जाता है.

हॉलीवुड मार्गोट रोबी हाल ही में लॉस एंजेलिस में फिल्म “वुथरिंग हाइट्स” के प्रीमियर पर स्किआपरेली के खास कस्टम आउटफिट में नजर आयीं. ऑस्कर-नॉमिनेटेड एक्ट्रेस के इस लुक में रोमांस, ड्रामा साफ झलक रहा है.

यह बस्टियर गाउन डिजाइनर और स्किआपरेली के आर्टिस्टिक डायरेक्टर डेनियल रोज़बेरी ने बनाया था. ड्रेस के ऊपरी हिस्से में न्यूड जर्सी का कॉर्सेट है, जिस पर काली चैंटिली लेस की लेयर है. पीछे की ओर गोल्ड मेटल आईलेट्स लगे हैं, जो इसे खास बनाते हैं.

ड्रेस के निचले हिस्से में मखमल (वेलवेट) की परतें थीं, जो धीरे-धीरे साटन में बदलती हैं. इसमें लाल से काले रंग का खूबसूरत इफेक्ट दिख रहा है. रेड कार्पेट पर मार्गोट ने कहा, “अगर ‘वुथरिंग हाइट्स’ को एक ड्रेस में बदला जाए, तो वह कुछ ऐसी ही दिखेगी. लेकिन लोगों की नजर एक्ट्रेस के ड्रेस से ज्यादा उनके गले में लटकते एक पैंडेंट पर टिकी. जब इसे करीब से देखा जाए तो मामूल होता है कि ये कोई मामूली नेकलेस नहीं बल्कि भारतीय विरासत से जुड़ा बेशकिमती हीरा है.
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वुदरिंग हाइट्स के प्रीमियर में मार्गोट रॉबी की ड्रेस से ज्यादा उनका नेकलेस स्पॉटलाइट में रहा. क्योंकि ये नेकलेस कोई मामूली नही, ताजमहल डायमंड है, जिस पर नूरजहां का नाम उर्दू में आज भी साफ पढ़ा जा सकता है.

इतिहासकारों की मानें तो बेशकिमती हीरे से जड़ा ये नेकलेस 17वीं शताब्दी में मुगल शासक जहांगीर ने अपनी सबसे ज्यादा करीबी और पसंदीदा बेगम नूरजहां को तौफे में दिया था. ये जहांगीर की 12वीं बेगम थी, जिनके नाम का मतलब था दूनिया की रोशनी.

ताज महल हीरा भारत का है और यह उन हजारों रत्नों और विरासत कलाकृतियों में से एक है जिन्हें अंग्रेजो के द्वारा भारत से ले जाया गया था. बताया जाता है कि इसे 1970 के दशक में कार्टियर ने खरीदा था, फिर टेलर के पति रिचर्ड बर्टन को बेच दिया गया और टेलर की मौत के बाद 2011 में नीलामी में बेच दिया गया. और अब ये नेकलेस मार्गोट रॉबी को पहले देखा गया है.

अंग्रेजों के भारत आने से पहले इसे सोने की चिड़िया कहा जाता था. यहां महंगे रत्नों और मसालों का भंडार था, जिसकी किमत वैश्विक स्तर पर भारी डिमांड और कीमत थी. इसे देखते हुए अंग्रेज धीरे-धीरे भारत से बेशकिमती रत्नों को ले गए. इसमें कोहीनूर हीरा समेत तमाम जेवरात शामिल है, जो दूनिया में और कहीं नहीं मिल सकते हैं.

लेकिन रॉबी के शो में इसके दिखने से वेस्टर्न सेलिब्रिटीज द्वारा भारत के गहने पहनने के मुद्दे पर फिर से बहस छिड़ गई है. 1700 के दशक तक भारत हीरों का विश्व का प्रमुख स्रोत था. भारत ब्रिटेन, अन्य सरकारों और निजी संग्राहकों से अपने गहने और अन्य खजाने, जिनमें ब्रिटिश शाही परिवार के पास मौजूद कोह-ए-नूर हीरा भी शामिल है, वापस करने की मांग कर रहा है.















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