Viswanathan Anand: आधुनिक शतरंज में क्या है असली हथियार? वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने बताया

Spread the love


Last Updated:

Viswanathan Anand Chess News: पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने गुरुवार को कहा कि आज जब खिलाड़ी कंप्यूटर की मदद से खेल रहे हैं, तब शतरंज में गहरी समझ ही असली निर्णायक बन गई है. आनंद ने बताया कि जब उन्होंने कई साल पहले कंप्यूटर का इस्तेमाल करना सीखा था, तब नए विचारों के लिए खुले रहना फायदेमंद होता है, लेकिन बारीकियों को समझना खिलाड़ी को आगे ले जाता है.

आधुनिक शतरंज में क्या है असली हथियार? वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने बतायाZoom

विश्वनाथन आनंद ने आधुनिक चेस में किसे बताया असली हथियार.

नई दिल्ली. पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने गुरुवार को कहा कि आज जब खिलाड़ी कंप्यूटर की मदद से खेल रहे हैं, तब शतरंज में गहरी समझ ही असली निर्णायक बन गई है. आनंद ने तीन दिन की शतरंज कार्यशाला के उद्घाटन में कहा, ‘दिलचस्प बात यह है कि जितना ज्यादा ज्ञान मिलता है, उतना ही कम समझ आता है. अगर हर दिन आपको 20-30 नए निष्कर्ष मिलते हैं, तो उन्हें समझना मुश्किल हो जाता है. मुझे लगता है कि आज के शतरंज खिलाड़ियों को अलग करने वाली सबसे बड़ी चीज गहरी समझ है.’

आनंद ने बताया कि जब उन्होंने कई साल पहले कंप्यूटर का इस्तेमाल करना सीखा था, तब नए विचारों के लिए खुले रहना फायदेमंद होता है, लेकिन बारीकियों को समझना खिलाड़ी को आगे ले जाता है. उन्होंने यह भी साफ किया कि शतरंज में महारत रटने से नहीं, बल्कि पैटर्न पहचानने से आती है. उन्होंने कहा, ‘हमारा दिमाग हमारी सोच से कहीं ज्यादा पैटर्न बनाता है. किसी का खेल देखने के हफ्तों बाद खिलाड़ियों के दिमाग में नए विचार आ जाते हैं. उन्हें पता नहीं चलता कि वे कहीं और से कुछ कॉपी कर रहे हैं.’

विश्वनाथन आनंद ने आधुनिक चेस में किसे बताया असली हथियार.

लगभग 6000 से 7000 प्रतियोगी मुकाबले खेल चुके आनंद ने बताया कि हमारा दिमाग अनजाने में ही दूसरे खिलाड़ियों के खेल से पैटर्न जोड़ लेता है. उन्होंने कहा, ‘हमारा दिमाग जितने पैटर्न समझता है, उतना हम समझा भी नहीं पाते. कई बार किसी मैच को देखने के हफ्तों बाद अचानक कोई नया आइडिया दिमाग में आता है और हमें पता भी नहीं चलता कि हम कहीं से कुछ कॉपी कर रहे हैं.’ शतरंज की तुलना भाषा से करते हुए आनंद ने कहा कि सिर्फ थ्योरी जानना काफी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘आपको खेल की समझ विकसित करनी पड़ती है. जैसे कोई भाषा सिर्फ डिक्शनरी से नहीं सीखी जा सकती, उसे बोलकर सीखा जाता है.’

तमिलनाडु के बड़े शहरों से आगे शतरंज को लोकप्रिय बनाने की सोच का समर्थन करते हुए आनंद ने कहा कि चेन्नई की सफलता को मदुरै, सलेम और कोयंबटूर जैसे शहरों में भी दोहराया जाना चाहिए. इस कार्यक्रम के दौरान आनंद की किताब ‘लाइटनिंग किड’ भी लॉन्च की गई, जिसे वेलम्मल एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से प्रकाशित किया गया है. यह मास्टरक्लास 12 से 14 फरवरी तक वेलम्मल एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित की जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि इंटरनेशनल मास्टर्स प्रज्ञानानंद (रैंक 4), वैशाली (रैंक 9), गुकेश डोम्माराजू (रैंक 9), वर्षिनी एस और मुरली कार्तिकेयन (दोनों रैंक 64) वेलम्मल के पूर्व छात्र रह चुके हैं.

About the Author

authorimg

Shivam Upadhyay

नवंबर 2025 से नेटवर्क 18 ग्रुप में सब एडिटर के पद पर कार्यरत. पत्रकारिता में 3 साल का अनुभव. जी न्यूज से खेल पत्रकारिता में डेब्यू किया. क्रिकेट के साथ-साथ हॉकी और बैडमिंटन के बारे में भी लिखने में दिलचस्पी. मा…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *