मेरठ रुस्तम ए जमा स्टेडियम में बेटियों का कुश्ती प्रशिक्षण बढ़ा

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बदलते दौर में अब कुश्ती केवल बेटों तक सीमित नहीं रही. मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के रुस्तम ए जमा दारा कुश्ती स्टेडियम में बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं. पहलवान दिव्या तोमर और दिव्यांशी ने अपने सपनों और कठिन प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए, वहीं कोच डा. जबर सिंह सोम ने बताया कि बेटियों में कुश्ती का उत्साह हर साल बढ़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अलका तोमर द्वारा स्थापित अकादमी भी इस क्षेत्र में युवतियों को प्रशिक्षण दे रही है, जिससे उत्तर प्रदेश कुश्ती के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

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मेरठ. कुश्ती की जब भी बात होती है, तो अक्सर बेटों का ही जिक्र होता है. लेकिन बदलते दौर में यदि बात करें, तो कुश्ती के दंगल में बेटियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अच्छे-अच्छे पहलवानों को चित करते हुए नजर आ रही हैं. इन्हीं बातों को देखते हुए लोकल-18 की टीम ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में संचालित रुस्तम ए जमा दारा कुश्ती स्टेडियम में कुश्ती सीख रही बेटियों और कोच डा. जबर सिंह सोम से खास बातचीत की. पहलवान दिव्या तोमर ने लोकल-18 की टीम से खास बातचीत में बताया कि उनके ताऊजी भी पहलवानी करते हैं. ऐसे में ताऊजी को देखकर उनमें भी पहलवानी के प्रति लगन जागी, इसलिए वह पिछले कई सालों से सीसीएसयू के रुस्तम ए जमा दारा कुश्ती स्टेडियम में कुश्ती का प्रशिक्षण ले रही हैं. उन्होंने बताया कि अब तक उन्होंने नेशनल स्तर के कई मेडल हासिल किए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी मेडल जीत चुकी हैं. दिव्या ने कहा कि उनका सपना ओलंपिक में मेडल लाने का है, जिसके लिए वह लगातार कठिन प्रशिक्षण कर रही हैं.

पापा के सपने को पूरा करने के लिए चुनी कुश्ती

पिछले तीन सालों से लगातार कुश्ती का प्रशिक्षण ले रही दिव्यांशी ने बताया कि उनके पापा का सपना है कि वह कुश्ती के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए भारत का नाम गर्व के साथ विश्व में रोशन करें. इस सपने को पूरा करने के लिए वह लगातार कुश्ती के दांव-पेंच सीखते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले रही हैं, उन्होंने कहा कि उनका सपना ओलंपिक में हिस्सा लेकर मेडल जीतना है. इसी तरह महिला पहलवान मानसी ने बताया कि वह कुश्ती कोच डा. जबर सिंह सोम से प्रशिक्षण ले रही हैं. उन्होंने कहा कि एक तरफ कुश्ती हमारी फिटनेस को बेहतर बनाती है, वहीं विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में भी कुश्ती के दांव-पेंच काफी काम आते हैं. उन्होंने सभी बेटियों को इस तरह का प्रशिक्षण लेने की सलाह दी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें.

हर साल लगातार बढ़ रही है संख्या

कुश्ती कोच डा. जबर सिंह सोम ने बताया कि एक समय ऐसा था जब पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित अलका तोमर ही कुश्ती का प्रशिक्षण लेती थी. जब अलका तोमर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता, उसके बाद कुश्ती के प्रति बेटियों में जुनून जागृत हुआ. अब माता-पिता खुद अपनी बेटियों को कुश्ती का प्रशिक्षण दिलाने के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं. इसके परिणामस्वरूप हर साल बेटियों की संख्या में लगभग 15 प्रतिशत वृद्धि हो रही है. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में उनके यहां 30 से अधिक बेटियां प्रशिक्षण ले रही हैं. वहीं, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और अर्जुन अवार्डी अलका तोमर ने भी सिसौली गांव में अकादमी की स्थापना की है, जिसमें बड़ी संख्या में बेटियां कुश्ती सीख रही हैं. डा. सोम ने कहा कि अब न केवल हरियाणा, बल्कि उत्तर प्रदेश भी कुश्ती के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए नजर आ रहा है.

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Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें



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