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महज 9 साल की उम्र में दिल्ली-एनसीआर की अरशी गुप्ता ने वह कर दिखाया, जो बड़े-बड़ों का सपना होता है. इंडियन नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप जीतकर वह भारत की सबसे कम उम्र की चैंपियन और एशिया की इकलौती महिला बनीं. फरीदाबाद से Formula 1 तक का उनका सफर जानना हर किसी को हैरान कर देगा. सब कुछ जानने के लिए हमारा पूरा लेख पढ़िए.
दिल्ली: हमारे देश में प्रतिभा की अब कोई उम्र नहीं रही. दिल्ली-एनसीआर की अर्शी गुप्ता नाम की इस लड़की की सच्ची कहानी ने यह अब साबित कर दिया है. दिल्ली-एनसीआर के फरीदाबाद इलाके में रहने वाली इस लड़की ने महज 9 साल की उम्र में ही भारतीय मोटरस्पोर्ट्स में इतिहास रच दिया है. हम आपको बता दें कि अर्शी ने हाल ही में अभी इंडियन नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप का खिताब जीता है. इस जीत के साथ वह न सिर्फ भारत की सबसे कम उम्र की राष्ट्रीय कार्टिंग चैंपियन बनी हैं, बल्कि एशिया की इकलौती महिला ड्राइवर भी हैं, जिन्होंने लड़कों के साथ होने वाली इस संयुक्त कार्ट रेसिंग में यह उपलब्धि हासिल की है.
अर्शी के पिता अंचित गुप्ता बताते हैं कि वह एक बार अर्शी को कार्ट रेसिंग ट्रैक पर लेकर गए थे. वहां उन्होंने देखा कि अर्शी को कार्ट चलाते हुए काफी मजा आ रहा था और वह स्पीड को बहुत एंजॉय कर रही थी. इसके बाद रेसिंग ट्रैक के मालिक ने उनसे कहा कि वह उनकी बेटी को बेंगलुरु ले जाकर एक बार प्रोफेशनल कार्ट रेसिंग ट्रैक पर कार्ट गाड़ी दौड़ाते हुए देखना चाहते हैं. जिसके बाद इसकी शुरुआत हुई और फिर अर्शी ने इसे प्रोफेशनली करना शुरू कर दिया और उस समय अर्शी की उम्र महज 7 साल थी. जिसके बाद 2 साल के भीतर ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली. फिर 2025 के नेशनल सीजन के दौरान उन्होंने चेन्नई और बेंगलुरु जैसे ट्रैकों पर जीत दर्ज की. इसके अलावा अंचित ने यह भी बताया कि वह ट्रेनिंग के लिए यूके और यूएई भी जाती रहती हैं और वह वहां के बड़े इंटरनेशनल कार्ट रेसिंग ड्राइवर्स के साथ भी रेस लगाती रहती हैं.
अब Formula 1 में भी मिली जगह
अर्शी का इतना शानदार प्रदर्शन देखकर अर्शी के माता-पिता ने बताया की उस चयन अब Formula 1 अकैडमी प्रोग्राम में हो गया है और अब यहां से उसकी आगे की राह और भी बड़ी हो गई है. यह प्रोग्राम 2026 तक उसके विकास को समर्थन देगा. महज 9 साल की उम्र में अर्शी न सिर्फ अपने से बड़े ड्राइवर्स को चुनौती दे रही हैं, बल्कि भारतीय मोटरस्पोर्ट्स के भविष्य की नई तस्वीर भी पेश कर रही हैं. अर्शी की माता ने हमें अंत में यह भी बताया कि रेसिंग और लगातार यात्राओं के बावजूद अर्शी पढ़ाई को भी पूरा महत्व देती हैं. वह बताती हैं कि वह रेस के बाद या फ्लाइट में मिलने वाले समय में पढ़ाई करती हैं और उनकी मां उन्हें पढ़ाती हैं. उनकी इस कोशिश का नतीजा यह है कि उन्हें स्कूल में पढ़ाई और सह-पाठयक्रम गतिविधियों के लिए प्रिंसिपल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है.
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