Homemade food cost । घर का खाना क्या सच में सस्ता है या छुपी लागत भी है?

Spread the love


Homemade food cost: हम में से ज्यादातर लोगों ने बचपन से एक बात सुनी है कि बाहर का खाना छोड़ो, घर का खाना बनाओ क्योंकि घर का खाना सस्ता पड़ता है. यह लाइन इतनी बार दोहराई गई है कि अब यह सलाह नहीं बल्कि सच मान ली गई है. लेकिन क्या वाकई घर का खाना हमेशा सस्ता होता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने इसी सोच को झकझोर कर रख दिया है. इस वीडियो में एक शख्स बेहद सीधे अंदाज में बताता है कि घर का खाना सस्ता जरूर लगता है, लेकिन उसकी एक छिपी हुई कीमत होती है, जिसे सालों से नजरअंदाज किया जाता रहा है.

वायरल वीडियो में उठाया गया सबसे जरूरी सवाल
वायरल क्लिप में वह शख्स एक बहुत साधारण लेकिन असहज करने वाला सवाल पूछता है. सस्ता किसके लिए और किससे तुलना करके. वह कहता है कि घर का खाना सस्ता बताने वाले ज्यादातर वही लोग होते हैं जिन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि खाना बनाने में कितना समय और कितनी मेहनत लगती है. यह सलाह अक्सर वही लोग देते हैं जो खुद कभी रोज किचन में खड़े नहीं रहे.

दाल चावल भी सिर्फ 10 मिनट में नहीं बनता
वीडियो में वह उदाहरण देता है कि घर की दाल चावल बनाने में सिर्फ गैस पर खड़े रहने का समय नहीं लगता. सब्जी धोना काटना, चावल साफ करना, पकाते वक्त निगरानी रखना और बाद में बर्तन साफ करना, यह सब मिलाकर करीब 45 मिनट या उससे ज्यादा का वक्त चला जाता है. इसके अलावा रोज क्या बनाना है यह सोचना, बाजार से सामान लाना और किचन मैनेज करना अलग से समय और दिमागी ऊर्जा मांगता है.

ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट जिसे हम हमेशा भूल जाते हैं
यहां वह एक अहम बात उठाता है जिसे ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट कहा जाता है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि अगर कोई इंसान उस समय में कोई और काम करके पैसे कमा सकता था, तो खाना बनाने का वह समय मुफ्त नहीं है. वह कहता है कि अगर खाना बनाने वाला व्यक्ति उस एक घंटे में 200 रुपये भी कमा सकता था, तो वह सस्ता खाना अपने आप महंगा हो जाता है.

सेहत की समस्या, रिलेशनशिप की उलझन, पैरेंटिग, लाइफस्टाइल, फैशन, पूजा-पाठ, ग्रह-नक्षत्र आदि से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी चाहिए तो आप अभी इस WhatsApp लिंक पर क्लिक करें.

महिलाओं की मेहनत को फ्री मानने की पुरानी आदत
उसके मुताबिक घर का खाना सस्ता इसलिए लगता रहा है क्योंकि घर की महिलाओं की मेहनत को कभी खर्च में जोड़ा ही नहीं गया. दादी मां, मां और पत्नी की किचन में लगने वाली मेहनत को पीढ़ियों से फ्री मान लिया गया. उनके समय, उनकी एनर्जी और कई बार उनकी सेहत की कीमत पर घर चलता रहा, लेकिन उसे कभी हिसाब में नहीं जोड़ा गया.

कब सच में सस्ता पड़ सकता है घर का खाना
वीडियो में वह बताता है कि घर का खाना असल में सिर्फ दो ही हालात में सस्ता पड़ सकता है. पहला तब, जब कोई बहुत कम पैसों में घरेलू मदद रख सके. दूसरा तब, जब हम मॉडर्न सुविधाओं को अपनाएं, जिनसे काम आसान और तेज हो जाए. जैसे रेडीमेड इडली बैटर, फ्रोजन सब्जियां, इंस्टेंट मिक्स, माइक्रोवेव, एयर फ्रायर या इंस्टेंट पॉट.

View this post on Instagram





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *