Indian Newspaper Day 2026: स्याही की वो महक और बचपन की यादें, जब अखबार सिर्फ खबर नहीं, एक एहसास हुआ करता था!

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आज सुबह जब दरवाजे पर अखबार गिरा, तो उसकी आवाज़ ने मुझे सीधे बचपन की सुनहरी यादों में पहुँचा दिया. आज भले ही हम मोबाइल की स्क्रीन पर खबरें ‘स्क्रॉल’ कर लेते हैं, लेकिन 90 के दशक तक हमारे दिन की शुरुआत उसी स्याही की खुशबू वाले कागज़ से ही होती थी. तब बचपन में हम बच्चों को देश-दुनिया की खबरों से उतना मतलब नहीं होता था, जितना उस अखबार के आने से होता था. जैसे ही साइकिल की घंटी बजती और हॉकर भइया अखबार फेंकते, हम भाई-बहनों में उसे सबसे पहले उठाने की दौड़ लग जाती थी.

बड़े-बुजुर्ग तो चाय की चुस्कियों के साथ मुख्य पन्ना, खेल और राजनीति पढ़ते थे, पर हमारा दिल तो ‘बाल कोना’ (Kids’ Section) में बसता था.तब ‘चाचा चौधरी’, ‘पिंकी’ और ‘बिल्लू’ के स्ट्रिप्स पढ़ना बहुत मजेदार था. यही नहीं, दिमागी कसरत के लिए अखबारों में ‘पहेलियाँ’ सुलझाना और ‘खोजो तो जानें’ वाले चित्रों में अंतर ढूँढना भी दिनभर के सबसे जरूरी कामों में से एक हुआ करता था. यही नहीं, रविवार के विशेष अंक में अपनी भेजी हुई कविता या पेंटिंग छपने का वो बेसब्री से इंतज़ार करना किसी एडवेंचर से कम नहीं होता था.

सिर्फ पढ़ना ही नहीं, स्कूल की कॉपियों पर ‘जिल्द’ (Cover) चढ़ाने के लिए पुराने अखबारों का इस्तेमाल करना भी एक अलग ही कला थी. और बारिश के दिनों में उसी अखबार की नाव बनाकर पानी में छोड़ना… वो खुशी आज के किसी भी महंगे गैजेट में नहीं है.आज भले ही दुनिया बदल गई हो, पर उस कागज़ की सरसराहट और स्याही की महक आज भी हमारे दिल के किसी कोने में महकती है.

भारतीय समाचार पत्र दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य

इस दिन को मनाने का सबसे बड़ा मकसद युवाओं को अखबार पढ़ने के फायदे बताना है. अखबार सिर्फ कागज नहीं, बल्कि ज्ञान का खजाना होते हैं जो हमें दुनिया से जोड़ते हैं. यह दिन पत्रकारों की मेहनत को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है, जो दिन-रात काम करके हम तक सच्ची खबरें पहुँचाते हैं.

इसके अलावा, यह दिवस हमें याद दिलाता है कि एक आजाद देश में सच बोलना कितना जरूरी है. अखबार समाज की बुराइयों को सामने लाते हैं और जनता की आवाज सरकार तक पहुँचाते हैं. संक्षेप में, यह दिन समाज में जागरूकता फैलाने और ईमानदारी से जानकारी साझा करने के महत्व को समर्पित है.

हालांकि आज समाचार पत्रों के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं. डिजिटल मीडिया के आने से लोगों के पढ़ने का तरीका बदल गया है. आजकल की युवा पीढ़ी खबरें पढ़ने के लिए अखबार के बजाय सोशल मीडिया और न्यूज़ ऐप्स का ज्यादा इस्तेमाल करती है. इससे कागज वाले अखबार पढ़ने वालों की संख्या कम हुई है.

लेकिन, इन मुश्किलों के बाद भी अखबारों का महत्व कम नहीं हुआ है. अखबारों ने खुद को आधुनिक बनाया है. आज लगभग हर बड़े अखबार के डिजिटल एडिशन और ई-पेपर उपलब्ध हैं. तकनीक की मदद से अखबार अब मोबाइल के जरिए नई पीढ़ी तक पहुँच रहे हैं और अपनी जगह बनाए हुए हैं.



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