Salt Water For Foot Bath: दिनभर काम के बाद शरीर और मन दोनों थक जाते हैं. पैरों में भारीपन, कमज़ोरी, और मन की बेचैनी महसूस होना आम बात है. अक्सर लगता है कि सिर्फ आराम करने या सोने से ही राहत मिल सकती है, लेकिन आयुर्वेद में इसके लिए एक बहुत ही सरल और असरदार तरीका बताया गया है -पाद-स्नान. यह प्रक्रिया सिर्फ कुछ मिनटों में शरीर और मन को शांति देती है. पाद-स्नान का मतलब है पैरों को गुनगुने पानी में नमक मिलाकर रखना. आयुर्वेद के अनुसार, पैरों की तलों में कई नाड़ी-बिंदु होते हैं, जो पूरे शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं. जब हम पैरों को गुनगुने नमक पानी में डुबोते हैं और शांति से बैठकर श्वास पर ध्यान देते हैं, तो यह शरीर और मन दोनों के लिए डिटॉक्स का काम करता है.
इससे न केवल पैरों का भारीपन कम होता है, बल्कि पूरे शरीर में हल्कापन और मन में ताजगी महसूस होती है. इस छोटे से आयुर्वेदिक अभ्यास से शरीर और मन की थकान दूर होती है, नींद बेहतर आती है और मानसिक बेचैनी भी कम होती है. यह रातभर की नींद को गहरी बनाने और तनाव को घटाने में मदद करता है. पाद-स्नान को रोजाना शाम के समय अपनाना शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है.
पैरों को गुनगुने नमक पानी में रखने के फायदे
1. दर्द और थकान में राहत
पैरों को गुनगुने नमक पानी में डुबोने से पैरों और शरीर में जमा भारीपन और थकान कम होती है. हल्के दर्द और ऐंठन भी दूर होती है, जिससे शरीर तुरंत हल्का महसूस करने लगता है.
2. बेहतर नींद
यह अभ्यास शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है और मस्तिष्क को आराम देता है. नतीजा यह होता है कि नींद गहरी और आरामदायक होती है.
3. शरीर का हल्का महसूस होना
नमक पानी शरीर के भारीपन को कम करता है. पाद-स्नान के बाद पूरा शरीर हल्का महसूस करता है और मन को भी राहत मिलती है.
4. मानसिक बेचैनी कम करना
नमक और पानी का मिश्रण नाड़ियों के तंत्र को शांत करता है. इससे मानसिक बेचैनी घटती है और मन स्थिर महसूस करने लगता है.

आयुर्वेद क्या कहता है
आयुर्वेद में पाद-स्नान को एक सरल और प्रभावी उपाय माना गया है. रोजाना शाम के समय अगर शरीर और मन भारी महसूस हो, तो पाद-स्नान इसे संतुलित करने में मदद करता है. यह अभ्यास शरीर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, मस्तिष्क को आराम देता है और तनाव घटाता है. नियमित पाद-स्नान से हैप्पी हॉर्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे मूड बेहतर रहता है और थकावट जल्दी नहीं लौटती. आयुर्वेद के अनुसार यह अभ्यास न केवल शरीर को हल्का करता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और मानसिक शांति भी बढ़ाता है.

कैसे करें पाद-स्नान
-एक बाल्टी या बर्तन में गुनगुना पानी लें.
-इसमें सेंधा या समुद्री नमक मिलाएं.
-पैरों को पानी में 10–15 मिनट डुबोकर बैठें.
-इस दौरान शांति से बैठकर गहरी सांस लें और मानसिक शांति पर ध्यान दें.
यह छोटा सा अभ्यास शरीर और मन को रिलैक्स करता है और रोजाना अपनाने से लंबे समय तक फायदे मिलते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)















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