Sushil Kumar moves to Delhi High Court: रेसलर सुशील कुमार ने खटखटाया दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा, जूनियर पहलवान सागर धनखड़ मर्डर केस में 20 को सुनवाई

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Sushil Kumar moves to Delhi HC: सागर धनखड़ हत्याकांड के मुख्य आरोपी और ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार, 20 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होगी. जस्टिस अनुप जयराम भंभानी की पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी. सुशील कुमार के वकील का तर्क है कि 42 मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अब साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है, इसलिए बदली परिस्थितियों में उन्हें राहत मिलनी चाहिए.

रेसलर सुशील कुमार ने खटखटाया दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजाZoom

सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

नई दिल्ली. भारतीय कुश्ती के इतिहास में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार एक बार फिर कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं.मई 2021 के सागर धनकड़ हत्याकांड में आरोपी सुशील कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.उनकी नियमित जमानत याचिका कल, यानी 20 फरवरी (शुक्रवार) को न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. सुशील कुमार के वकील साहिल मलिक के माध्यम से दायर इस याचिका में बदले हुए हालातों का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की गई है. इससे पहले 6 फरवरी को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने सुशील की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी.

इस मामले में कानूनी घटनाक्रम काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. मार्च 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुशील कुमार (Sushil Kumar) को नियमित जमानत दी थी. 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर जमानत रद्द कर दी कि महत्वपूर्ण गवाहों की जांच अभी बाकी है. 20 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुशील कुमार ने आत्मसमर्पण किया. सुप्रीम कोर्ट ने उस समय सुशील को यह छूट दी थी कि यदि परिस्थितियों में कोई ठोस बदलाव आता है या नए आधार बनते हैं, तो वह संबंधित अदालत में फिर से आवेदन कर सकते हैं.

सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

जमानत के मुख्य आधार
सुशील कुमार के बचाव पक्ष का तर्क है कि अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं. याचिका में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष के कुल 222 गवाहों में से सभी 42 ‘महत्वपूर्ण सार्वजनिक गवाहों’ (जिनमें घायल भी शामिल हैं) के बयान रोहिणी कोर्ट में दर्ज किए जा चुके हैं. ऐसे में अब आरोपी द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं बची है. याचिका में तर्क दिया गया है कि सुशील कुमार को ‘खतरनाक अपराधियों’ की संगति में जेल में रखने का अब कोई सार्थक उद्देश्य नहीं रह गया है. लंबे समय तक कारावास उनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक साबित हो रहा है.

करियर और सम्मान
सुशील कुमार देश के प्रतिष्ठित खिलाड़ी रहे हैं, जिन्हें पद्म श्री (2011), राजीव गांधी खेल रत्न (2009) और अर्जुन पुरस्कार (2005) से सम्मानित किया जा चुका है.

क्या था पूरा मामला?
यह मामला 4 और 5 मई, 2021 की दरम्यानी रात का है.आरोप है कि सुशील कुमार और उनके सहयोगियों ने मॉडल टाउन और शालीमार बाग से सागर धनखड़, सोनू और अन्य का अपहरण किया और उन्हें जबरन छत्रसाल स्टेडियम की पार्किंग में ले गए. वहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई.गंभीर चोटों के कारण उसी दिन इलाज के दौरान सागर धनखड़ की मौत हो गई. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सुशील कुमार को मुख्य आरोपियों में से एक माना है.

विरोध का पक्ष
मृतक के पिता के वकील एडवोकेट जोशिनी तुली ने इस जमानत का कड़ा विरोध किया है. अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामला अभी भी गवाही के दौर में है और अपराध की गंभीरता को देखते हुए राहत नहीं दी जानी चाहिए.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें



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