Waqf Amendment Act 2025 Hearing adjourned for 17 April Supreme Court may give interim order ann

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (16 अप्रैल, 2025) को वक्फ एक्ट मामले पर लगभग दो घंटा सुनवाई चली. कोर्ट ने मामले को लेकर जारी विवाद के तात्कालिक समाधान के लिए कुछ अंतरिम आदेश देने के मंशा जताई. हालांकि, ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया. केंद्र सरकार समेत नए कानून के समर्थन कर रहे याचिकाकर्ताओं की दलीलों के पूरा न होने के चलते कोर्ट ने सुनवाई गुरुवार, दोपहर 2 बजे जारी रखने की बात कही.

वक्फ मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगभग 150 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं. इनमें से 72 याचिकाएं चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और के वी विश्वनाथन की बेंच में लगी थीं. कोर्ट ने सुनवाई की शुरुआत में 2 सवाल किए- 
1. सुप्रीम कोर्ट मामले को खुद सुने या किसी हाई कोर्ट के पास भेज दे?
2. याचिकाकर्ताओं के मुख्य मुद्दे क्या हैं?

याचिकाकर्ताओं की तरफ से कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी, हुजैफा अहमदी, संजय हेगड़े समेत कई वरिष्ठ वकीलों ने दलीलें रखीं. उन्होंने वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ काउंसिल में गैर मुस्लिम सदस्यों को जगह दिए जाने का विरोध किया. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार वक्फ की किसी जमीन पर दावा करती है, तो उस पर फैसला लेने का अधिकार सरकारी अधिकारियों को ही दिया गया है. यह गलत है.

इन वरिष्ठ वकीलों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि नए कानून के चलते संरक्षित इमारतों का वक्फ का दर्जा छिन सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बाय यूजर को खत्म कर देने से कई पुरानी संपत्तियों पर असर पड़ेगा. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट को भी वक्फ की संपत्ति बता कर दावा किया जाता है. नए कानून में दावों को लेकर व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई है.

इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से याचिकाकर्ताओं की बातों पर जवाब मांगा. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जो भी संपत्तियां रजिस्टर्ड हैं, उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि दिल्ली की जामा मस्जिद भी वक्फ बाय यूजर है. अंग्रेजों के आने से पहले भारत में रजिस्ट्रेशन का प्रावधान नहीं था. ऐसे में इसके कागजात नहीं हो सकते.

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जो संपत्तियां रजिस्टर्ड नहीं हैं. उन्हें वक्फ बोर्ड रजिस्टर्ड करवा सकता है. उसे इसका मौका दिया जाएगा. तुषार मेहता ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल में बहुत सीमित संख्या में गैर मुस्लिम सदस्यों को रखा जाएगा. एक्स ऑफिशियो मेंबर्स के अलावा सिर्फ दो गैर मुस्लिम सदस्यों की जगह बोर्ड में होगी. हालांकि जज इन बातों से पूरी तरह से आश्वस्त नजर नहीं आए. उन्होंने पूछा कि क्या केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर ले सकते हैं. मेहता ने कहा कि वह लिखित हालकनामा देने को तैयार हैं. यही बात जेपीसी की रिपोर्ट में भी लिखी गई थी.

तुषार मेहता ने मामले को किसी हाई कोर्ट में भेजे जाने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट नोटिस जारी करे. सरकार उसका दो सप्ताह में जवाब देगी. उसके बाद तेजी से सुनवाई करके मामले का निपटारा कर दिया जाए. वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट को बताया कि पुराने वक्फ कानून के विरोध में हाई कोर्ट में 140 याचिकाएं लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट को इस सुनवाई में उन याचिकाओं को भी सुनना चाहिए.

चीफ जस्टिस ने कहा कि वह अंतरिम समाधान के तौर पर दो निर्देश देना चाहते हैं. पहला यह कि सुनवाई लंबित रहने तक किसी वक्फ संपत्ति को डिनोटिफाई न किया जाए, यानी उनकी स्थिति पहले जैसी बने रहने दी जाए. दूसरा, वक्फ बोर्ड में एक्स ऑफिशियो मेंबर्स (पदेन सदस्यों) के अलावा फिलहाल किसी गैर मुस्लिम को न रखा आए.

सॉलीसिटी जनरल तुषार मेहता और नए वक्फ कानून के समर्थन में याचिका दाखिल करने वाले कुछ याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने इस अंतरिम आदेश का विरोध किया. उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए. इस पर कोर्ट ने सुनवाई गुरुवार, दोपहर 2 बजे जारी रखने की बात कही.

 

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