what is CRP test: किन-किन बीमारियों का पता बताता है CRP Test, किस उम्र में इसे कराना जरूरी?

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When to get CRP blood test: जब शरीर में कोई इंफेक्शन या सूजन होती है, तो शरीर खुद उसे पहचानने और लड़ने की कोशिश करता है. इसी प्रक्रिया में लीवर एक स्पेशल प्रोटीन बनाता है जिसे सी-रिएक्टिव प्रोटीन या सीआरपी कहा जाता है. इस प्रोटीन का स्तर जब बढ़ता है, तो यह संकेत देता है कि शरीर में कहीं न कहीं सूजन या इंफेक्शन मौजूद है. यही कारण है कि डॉक्टर अक्सर मरीजों को सीआरपी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. यह एक सामान्य ब्लड टेस्ट है, लेकिन इसके नतीजे कई गंभीर बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह टेस्ट कब करवाया जाता है और किस उम्र में इसको करवाना सही है.

सीआरपी टेस्ट क्या है?

अब आते हैं कि इसका टेस्ट क्यों करवाया जाता है. सीआरपी टेस्ट खून में मौजूद इस प्रोटीन की मात्रा मापता है. मेयो क्लिनिक के अनुसार, जब शरीर में इंफेक्शन या चोट होती है, तो लीवर तुरंत सीआरपी का स्तर बढ़ा देता है. सामान्य रूप से खून में इसकी मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन अगर यह स्तर बढ़ा हुआ मिले, तो यह किसी प्रकार की इंफ्लेमेशन या इंफेक्शन का संकेत हो सकता है.

किन-किन बीमारियों का पता बताता है सीआरपी टेस्ट?

जब शरीर में कोई गंभीर इंफेक्शन होता है, जैसे सेप्सिस, तो सीआरपी स्तर तेजी से बढ़ता है. क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट बताती है कि यह टेस्ट ऐसे मामलों में सूजन की तीव्रता का पता लगाने में मदद करता है. इसके अलावा ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस और ल्यूपस में शरीर अपनी ही सेल्स पर हमला करता है. इन स्थितियों में भी सीआरपी का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है, जिससे बीमारी की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है. आंतों की सूजन संबंधी बीमारियों में भी सीआरपी बढ़ सकता है. कुछ ऐसे टेस्ट होते हैं, जिसे एचएस-सीआरपी कहते हैं, वह हार्ट की सेहत का आकलन करने में काम आता है. अगर इसका स्तर लगातार बढ़ा हुआ हो, तो यह हार्ट की ब्लड वेसेल्स में सूजन और भविष्य में हार्ट अटैक के जोखिम का संकेत हो सकता है.

किस उम्र में कराना चाहिए सीआरपी टेस्ट?

सामान्य रूप से हर व्यक्ति को यह टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती. लेकिन अगर बार-बार इंफेक्शन, लगातार बुखार, जोड़ों में दर्द, थकान या किसी गंभीर बीमारी के लक्षण दिख रहे हों, तो डॉक्टर इसे सुझा सकते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, हृदय रोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए 30 से 40 साल की उम्र के बाद एचएस-सीआरपी टेस्ट समय-समय पर कराना फायदेमंद हो सकता है, खासकर यदि परिवार में हार्ट रोग की कोई हिस्ट्री हो.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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